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पति का स्नेह पाने के लिए करें मंगला गौरी व्रत

इंट्रो – मंगल को वैवाहिक जीवन के लिए अमंगलकारी माना जाता है क्योंकि कुण्डली में मंगल की विशेष स्थिति के कारण ही मंगलिक योग बनता है जो दांपत्य जीवन में कलह और विभिन्न समस्याओं का कारण बनता है । मंगल की शांति के लिए मंगलवार का व्रत और हनुमान जी की पूजा को उत्तम माना जाता है । लेकिन अन्य दिनों की अपेक्षा सावन मास में सोमवार के अलावा मंगलवार का भी शास्त्रों में स्त्रियों के लिए सौभाग्य दायक बताया गया है…

श्रावण मास में जितने भी मंगलवार पड़े उन सभी को मंगलागौरी व्रत करने का विधान है । यह व्रत मंगलवार को पड़ता है और इस व्रत में माता गौरी अर्थात् पार्वती की पूजा की जाती है, जिसके कारण इस व्रत को मंगला गौरी व्रत कहते हैं । मंगला गौरी व्रत को मोराकत व्रत के नाम से भी जाना जाता है | पुराणों के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती को श्रावण मास अति प्रिय है | इसीलिए श्रावण मास के सोमवार को शिव जी और मंगलवार को माता गौरी अर्थात् पार्वती जी की पूजा को शास्त्रों में बहुत ही शुभ व मंगलकारी बताया गया हैं | इस वर्ष मंगला गौरी व्रत २३ जुलाई, ३० जुलाई, ६ अगस्त और १३ अगस्त को पड़ रहा हैं |

मंगला गौरी व्रत के प्रभाव से विवाह में हो रहे विलंब समाप्त हो जाते हैं तथा जातक को मनचाहे जीवन साथी की प्राप्ति होती हैं, दांपत्य जीवन सुखी रहता है तथा जीवनसाथी के प्राणो की रक्षा होती है, पुत्र की प्राप्ति होती हैं, गृहकलेश समाप्त होता है, डाइवोर्स तथा सेपरेशन से संबन्धित ज्योतिष योग शांत होते हैं, अकाल मृत्यु योग समाप्त होते हैं, तीनों लोको में ख्याति मिलती है, सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है |

यह व्रत विवाह के पश्चात् प्रत्येक विवाहिता द्वारा पाँच वर्षों तक करना शुभफलदायक माना गया है । इस व्रत को विवाह के प्रथम श्रावण में पिता के घर (पीहर) में तथा शेष चार वर्ष पति के घर (ससुराल) में करने का विधान है | शास्त्रों के अनुसार जो नवविवाहित स्त्रियां सावन मास में मंगलवार के दिन व्रत रखकर मंगला गौरी की पूजा करती हैं उनके पति पर आने वाला संकट टल जाता है और वह लंबे समय तक दांपत्य जीवन का आनंद प्राप्त करती हैं ।

व्रत की विधि

इस दिन व्रती को नित्य कर्मों से निवृत्त होकर संकल्प करना चाहिए कि मैं संतान, सौभाग्य और सुख की प्राप्ति के लिए मंगला गौरी व्रत का अनुष्ठान कर रही हूँ । तत्पश्चात आचमन एवं मार्जन कर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर माता की प्रतिमा व चित्र के सामने उत्तराभिमुख बैठकर प्रसन्न भाव में एक आटे का दीपक बनाकर उसमें सोलह बातियां जलानी चाहिए इसके बाद सोलह लड्डू, सोलह फल, सोलह पान, सोलह लौंग और ईलायची के साथ सुहाग की सामग्री और मिठाई माता के सामने रखकर अष्ट गंध एवं चमेली की कलम से भोजपत्र पर लिखित मंगला गौरी यंत्र स्थापित कर विधिवत विनियोग, न्यास एवं ध्यान कर पंचोपचार से उस पर श्री मंगला गौरी का पूजन कर उक्त मंत्र- “कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम् । नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम् ।।” का जप 64,000 बार करना चाहिए । उसके बाद मंगला गौरी की कथा सुनें । इसके बाद मंगला गौरी का सोलह बत्तियों वाले दीपक से आरती करें । कथा सुनने के बाद सोलह लड्डू अपनी सास को तथा अन्य सामग्री ब्राह्मण को दान कर दें । पांच साल तक मंगला गौरी पूजन करने के बाद पांचवे वर्ष के श्रावण के अंतिम मंगलवार को इस व्रत का उद्यापन करना चाहिए ।

इस दिन देवी मंगला गौरी के साथ शिव गणेश कार्तिके, नंदी, हनुमान जी, तथा भैरव का पूजन भी किया जाता है ।

पुरूष क्या करें
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिन पुरुषों की कुंडली में मंगलिक योग है उन्हें इस दिन मंगलवार का व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए । इससे उनकी कुण्डली में मौजूद मंगल का अशुभ प्रभाव कम होगा और दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है ।

मासिक शिवरात्रि

Poetry and Painting Competition Organised By Rachna Sansar